Wednesday, September 15, 2021

एहसास

 क्या हूं और कौन हूं मैं

मेरे होने का ऐहसास करा सकू मैं...


इक हवा का झोंका बनू

पास से गुजरू तो छू सकू मैं..


आवारा बंजारा बादल ही बनू

जहां भी रहो तो भी देख सकू मैं...


बारिशों के बूंदों में समा जाऊं

हथेली पे तेरी मोती सा चमकू मैं....


एक चुटकुला सा ही सही

मुस्कुराने की वजह तो बन सकू मैं...


@साकी

4 comments:

  1. Wonderful Saki .. मुस्कुराने की वजह तो बन सकु मैं.... Classic

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  2. वाह वाह बहोत खूब 👍

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