Wednesday, September 15, 2021

एहसास

 क्या हूं और कौन हूं मैं

मेरे होने का ऐहसास करा सकू मैं...


इक हवा का झोंका बनू

पास से गुजरू तो छू सकू मैं..


आवारा बंजारा बादल ही बनू

जहां भी रहो तो भी देख सकू मैं...


बारिशों के बूंदों में समा जाऊं

हथेली पे तेरी मोती सा चमकू मैं....


एक चुटकुला सा ही सही

मुस्कुराने की वजह तो बन सकू मैं...


@साकी

Tuesday, September 7, 2021

हम बस देखते रहे...

बड़े अरमानों से घटाओ को देखते रहे

आरजू लगाए हम बस देखते रहे...


ठंडी हवाओं के साए में झूमते रहे

फिजा के रुख को बदलते हम बस देखते रहे...


जमीं हमारी प्यास में झुलसती रही

बादलों को बरसते हम बस देखते रहे...


@ साकी

दिल्लगी

इक ख्वाब सा आगाज जीने का बस इक ही जुनून, तुमसे शुरू यह दास्तान तुम्ही पे खतम ये कहानी... यूंही हाथ छूटना तेरा कभी दिल टूटने से कम ना लगा, दो...