बड़े अरमानों से घटाओ को देखते रहे
आरजू लगाए हम बस देखते रहे...
ठंडी हवाओं के साए में झूमते रहे
फिजा के रुख को बदलते हम बस देखते रहे...
जमीं हमारी प्यास में झुलसती रही
बादलों को बरसते हम बस देखते रहे...
@ साकी
Mast...Saki.. wish to enjoy your poems on Saaqi's world
शुक्रिया जी
इक ख्वाब सा आगाज जीने का बस इक ही जुनून, तुमसे शुरू यह दास्तान तुम्ही पे खतम ये कहानी... यूंही हाथ छूटना तेरा कभी दिल टूटने से कम ना लगा, दो...
Mast...Saki.. wish to enjoy your poems on Saaqi's world
ReplyDeleteशुक्रिया जी
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